
हनुमान जन्मोत्सव : हनुमान लोक के साथ जामसांवली धाम बना विश्वस्तरीय आस्था केन्द्र सतपुड़ा की वादियों में बसता आस्था का धाम, जामसांवली रच रहा नया इतिहास जामसांवली धाम – जहां चमत्कार, श्रद्धा और आधुनिकता का अनूठा संगम
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
आस्था, विश्वास और भक्ति के केन्द्र के रूप में स्थापित चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर हनुमान लोक जामसांवली धाम निरंतर ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी बनता जा रहा है। सतपुड़ा की हरित वादियों के मध्य बसे पांढुर्णा जिले के सौसर तहसील का यह चमत्कारिक जामसांवली धाम देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी ख्याति स्थापित कर चुका है। रामनवमी से निरंतर जारी धार्मिक आयोजनों के माध्यम से यह धाम भक्ति के महासागर में परिवर्तित होता जा रहा है, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु हनुमानजी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं। मंदिर संस्थान द्वारा हनुमान जयंती, गुरु पूर्णिमा और नूतन वर्ष के साथ-साथ प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को विशेष आयोजन किए जाते हैं, जो श्रद्धालुओं को हनुमानजी के समक्ष शीश नवाने के लिए प्रेरित करते हैं। बीते एक वर्ष में इस धाम का स्वरूप निरंतर भव्य और ऐतिहासिक होता गया है।

हनुमान जी का चमत्कारिक इतिहास
जामसांवली धाम का इतिहास अत्यंत प्राचीन और अद्भुत माना जाता है। यहां भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी पीपल के वृक्ष के नीचे निद्रा मुद्रा में विराजमान हैं, जो देश के अद्वितीय मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि हजारों वर्ष पूर्व यह विशाल प्रतिमा घास के बीच छिपी हुई थी, जिसे एक किसान ने खेत जोतते समय देखा। इसके बाद यह स्थल श्रद्धा का प्रमुख केन्द्र बन गया और आज करोड़ों भक्तों की आस्था का आधार है। वर्ष 1996 में सीमित संसाधनों से प्रारंभ हुआ यह मंदिर आज हनुमान लोक जैसे विशाल धार्मिक परिसर के रूप में विकसित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 314 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना को आकार दिया जा रहा है। राम नवमी के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के करकमलों से प्रथम चरण का लोकार्पण हो चुका है, वहीं द्वितीय चरण की भी घोषणा की जा चुकी है। पूर्ण होने पर यह धाम महाकाल लोक उज्जैन की तर्ज पर भव्य और विश्वस्तरीय धार्मिक केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।

आस्था और आधुनिकता का अद्भुत संगम
मंदिर संस्थान के अध्यक्ष श्री गोपाल शर्मा ने बताया कि हनुमान लोक केवल मंदिर विस्तार नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और पौराणिक परंपराओं का अनूठा समन्वय है। लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह कॉरिडोर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। यहां धार्मिक आस्था के साथ जनभागीदारी और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का व्यापक समावेश भी देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में 5 करोड़ रुपये से अधिक लागत से 11 एकड़ भूमि खरीदी गई, शासन से प्राप्त 25 एकड़ भूमि पर बजरंग गौशाला की स्थापना की गई, भव्य सभामंडप का निर्माण, प्रसादम एवं भक्त निवास का जीर्णोद्धार, लिफ्ट, प्रशासनिक भवन, आरओ पेयजल व्यवस्था, पूजा सामग्री दुकानों का सुव्यवस्थित पुनर्वास, पेवर ब्लॉक, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग और सोलर प्लांट की स्थापना जैसे कार्य किए गए हैं। वर्तमान में मंदिर संस्थान के पास 68 एकड़ से अधिक स्वयं की संपत्ति उपलब्ध है, जो इसे एक विशाल धार्मिक परिसर के रूप में विकसित कर रही है।

विश्व पटल पर पहचान
जामसांवली धाम अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सोशल मीडिया और आधुनिक माध्यमों के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हनुमान लोक के द्वितीय चरण में भव्य गर्भगृह निर्माण, चिंरजीवी पथ, नाला संरक्षण एवं सौंदर्गीकरण, वृहद एसटीपी प्लांट, सोलर विस्तार और मानसिक पुनर्वास केंद्र जैसे महत्वाकांक्षी प्रकल्प शामिल हैं। जामसांवली धाम आज केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कार का जीवंत प्रतीक बन चुका है और आने वाले समय में हनुमान लोक के पूर्ण होने के बाद यह देश के प्रमुख धार्मिक धामों में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।
हनुमान जन्मोत्सव भक्ति का महाकुंभ
गत 26 मार्च से जामसांवली धाम में प्रारंभ हुए हनुमान जन्मोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर 2 अप्रैल तक पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य महाराज द्वारा श्रीराम कथा का वाचन किया जा रहा है। 1 अप्रैल को “राम आएंगे…” प्रसिद्ध भजन की प्रस्तुति देने वाली भजन गायिका स्वस्ति मेहूल द्वारा भजन संध्या आयोजित की जाएगी। वहीं 2 अप्रैल की मध्यरात्रि वाराणसी से आए पुरोहितों द्वारा अभिषेक एवं प्रातः 4 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा। अब तक संपन्न कार्यक्रमों में श्रद्धेय विवेक महाराज द्वारा हनुमत चरित्र वाचन तथा प्रसिद्ध हनुमत कृपापात्र रसराज महाराज की उपस्थिति में ग्यारह हजार श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक सुंदरकांड वाचन किया जा चुका है।
